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Friday, January 9, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई:कहा- टीनएज रिश्तों को कानून से बाहर रखें, केंद्र रोमियो-जूलियट क्लॉज लाने पर विचार करे

सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों के यौन अपराधों से जुड़े सुरक्षा कानून पॉक्सो एक्ट के दुरुपयोग पर चिंता जताई। कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाने पर विचार करे, ताकि सहमति से बने असली टीनएज रिश्तों (किशोर अवस्था) को इस कानून के कड़े प्रावधानों से बाहर रखा जा सके। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शुक्रवार को कहा कि पॉक्सो जैसे सख्त कानून के बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए यह जरूरी है कि सरकार प्रभावी कदम उठाए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि इस फैसले की एक प्रति कानून सचिव को भेजी जाए, ताकि कानून में संभावित सुधारों पर विचार किया जा सके। साथ ही एक ऐसा सिस्टम बनाया जा सके जिससे उन लोगों पर केस हो जो इन कानूनों का गलत इस्तेमाल करके बदला लेना चाहते हैं। यह मामला उत्तर प्रदेश सरकार की उस याचिका से जुड़ा था, जिसमें उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उस आदेश में हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न के एक मामले में आरोपी को जमानत दी थी, जिसमें एक नाबालिग लड़की शामिल थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को गलत माना, लेकिन आरोपी को दी गई जमानत को बरकरार रखा। हाईकोर्ट बेल स्टेज पर मेडिकल एज तय नहीं कर सकता पॉक्सो कानून के दुरुपयोग पर चिंता फैसले में कहा गया कि जब किसी अच्छे और जरूरी कानून का इस्तेमाल बदले या निजी हित के लिए किया जाता है, तो इससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज में एक तरफ ऐसे बच्चे हैं जो डर, बदनामी या गरीबी के कारण चुप रह जाते हैं, जबकि दूसरी तरफ संसाधन-संपन्न लोग कानून का गलत फायदा उठा सकते हैं। कोर्ट ने वकीलों की नैतिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया और कहा कि उन्हें फालतू और बदले की भावना से किए जाने वाले मुकदमों के खिलाफ गेटकीपर की भूमिका निभानी चाहिए। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें... नाबालिग के साथ यौन-अपराध में थोड़ा भी पेनिट्रेशन बलात्कार, बॉम्बे हाईकोर्ट बोला- नाबालिग की सहमति होने पर भी यह जुर्म बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने पॉक्सो के मामले में फैसला सुनाते हुए कहा, 'नाबालिग के साथ यौन अपराध में थोड़ा सा भी पेनिट्रेशन बलात्कार माना जाएगा। ऐसे मामलो में नाबालिग की सहमति का भी कोई महत्व नहीं होगा।' पूरी खबर पढ़ें...
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